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Showing posts from November, 2020

कुछ करना चाहता हूँ! - An Incomplete Desire.

कुछ करना चाहता हूँ   ज़िंदगी के पायदान पे जो खामोशियों का शोर था, कटते हुए राह-ए-गुज़र मे  कमजोरियों का ज़ोर था, उस शांत सागर के विध्वंस  को जगाना चाहता हूँ,     कुछ करना चाहता हूँ | किसी की भूख का निवाला,  किसी की प्यास का मैं प्याला,  किसी के घाव का मरहम,  टूटती राग का मैं सरगम,  अपने देश का मैं परचम,  होना चाहता हूँ | माँ, मैं कुछ तो करना चाहता हूँ | वो था जो हमसे छूट गया,  पाला था जो सपना टूट गया,  उस खेत की सूखी सतह पर  खुल कर बरसाना चाहता हूँ,   माँ, मैं कुछ करना चाहता हूँ |                                                                                                                ...