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Showing posts from May, 2018

और लहू बहता रहा - A short view of Jaliyawalabaag

                     और लहू बहता रहा                                   -A short view of Jaliyawalabaag. न जाने कौन सी घडी थी वो , उस समय से थे अंजान हम सभी , दुआ भी न मांगू   की ऐसा हो सपने में भी अन्य दिखे वैसा कभी सारा समां ख़ामोशियों की आग़ोश में था, कोई न था बोलने वाला और न कोई था   सुनने वाला , लहू बिखरा पड़ा था ज़मीन पर , काग़ज़ के टुकड़े कफ़न बने थे धरती तो क्या , आसमाँ भी नज़र न डाल पाया ऐसे मंज़र पर ! देखते अगर कोई तो उसकी रूह काँप जाती देख लेता अगर उस मंज़र को कोई , तो खुशियाँ हमेशा के लिए उसे छोड़ देती कैसा था वो . ..........? थम सा गया था आसमान बदल फिर भी चल रहे थे आकृति उनकी बड़ी अज़ीब थीं ऐसा लग रहा था कुछ कह रहें हों। हर दिशा में एक ही रंगोली सजी थी जिस तरफ   द...

एक स्वप्न- A Dream

                                        एक   स्वप्न  - A Dream I was on journey to Kashmir with my friends Rohit, Pankaj and Shirish.  I have  seen something in my dream and suddenly woken up with a strange feeling that made me stunned, what was going on? I really didn't get.  After that I was unable to sleep and then decided to write the conversation between a girl and a boy in my own poetic form.   एक दौर गुजर गया आपस में बिछड़ने के बाद ,  पर यादें अटल हैं . मिलना और जुदा होना नियति के हाथ में रहा , इसलिए दोष किसी को दे नहीं सकते , पर सुनहरी यादों को सहेज कर रख सकते हैं .   एहसास बूढ़े कहाँ होते हैं कभी , वो तो थमें हुए हैं इंतज़ार में .. अब एक पल का इंतज़ार है ताकि आमने   सामने होकर उस सुनहरे क्षण को तराशते हुए यह कह सकें कि इस...

अलिखित पन्ने

 मेरी पहली कविता (My First Poem)..... न जाने कैसे शुरुआत की हमने , कैसे लिखने का मन होने लगा , कुछ पता ही नहीं   चला  तब मैं स्नातक प्रथम वर्ष का छात्र था  ज ब पहली बार कुछ लिखना चाहा जो की आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ आशा करता हूँ की आपको यह पसंद आये !!!                                                                            " अलिखित पन्ने "   कुछ अनगिनित , अलिखित उन पन्नों को पढाना चाहता था मैं जो कभी तुम्हारे लिए लिखे थे मैंने , शायद कभी उनमें वो हंसी पल थे    वे   हंसी स्मृतियां थी , मेरी तुम्हारे लिए जिन्हें पढ़कर तुम मुझे अपने में समाहित करना चाहती तुम , लेकिन जब तुमने उन पलों को खोला , मेरी लाख कोशिशों के बाद भी , तुम मेरी लिख...