मेरी पहली कविता (My First Poem).....
न जाने कैसे शुरुआत की हमने, कैसे लिखने का मन होने लगा, कुछ पता ही नहीं चला तब मैं स्नातक प्रथम वर्ष का छात्र था जब पहली बार कुछ लिखना चाहा जो की आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ आशा करता हूँ की आपको यह पसंद आये!!!
"अलिखित पन्ने"
कुछ अनगिनित,अलिखित उन पन्नों को पढाना चाहता था मैं
जो कभी तुम्हारे लिए लिखे थे मैंने,
शायद कभी उनमें वो हंसी पल थे
वे हंसी स्मृतियां थी, मेरी तुम्हारे लिए
वे हंसी स्मृतियां थी, मेरी तुम्हारे लिए
जिन्हें पढ़कर तुम मुझे अपने में
समाहित करना चाहती तुम,
लेकिन जब तुमने उन पलों को खोला,
मेरी लाख कोशिशों के बाद भी,
तुम मेरी लिखावट पढ़ न सकी,
तुम्हें उनमें कुछ लिखा सा, न मिला ?
एहसास हुआ की तुम्हारा जीवन भी
अभी कोरा है उन अलिखित पन्नो की भांति
शायद इसीलिए ....................
की मैं कभी तुम्हारा था ही नहीं
और उन अलिखित पन्नो में
मेरा कुछ था ही नहींक्या यही था उन पन्नो का अस्तित्व ?
यही था मेरे प्रेम जीवन का अस्तित्व ??
-Pankaj Singh "Sahitya"