नाम थी ज़िन्दगी लिखनी थी किताब नाम थी ज़िन्दगी ; थे पन्ने बेहिसाब नाम थी ज़िन्दगी साहस की पैमाइशें मन में न थी , सोच भी तनहा ही थी , विश्वास का भी उन्वान था , चेतक सी कल्पनाओ पर बैठा मैं प्रताप था बचपन का था ख्वाब , नाम थी ज़िन्दगी, लिखनी थी एक किताब नाम थी ज़िन्दगी। तब रुकावटों के ख्याल न थे , चहरे पर सिलवटें से सवाल न थे , अभी अभी बनी हुयी सड़क जैसे रास्तों पर गड्ढों के निशाँ भी न थे ; स्याही से भरी थी दवात, नाम थी ज़िन्दगी, लिखनी थी वो किताब ...