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कुछ करना चाहता हूँ! - An Incomplete Desire.



कुछ करना चाहता हूँ 


ज़िंदगी के पायदान पे
जो खामोशियों का शोर था,
कटते हुए राह-ए-गुज़र मे 
कमजोरियों का ज़ोर था,
उस शांत सागर के विध्वंस 
को जगाना चाहता हूँ,    
कुछ करना चाहता हूँ |


किसी की भूख का निवाला, 
किसी की प्यास का मैं प्याला, 
किसी के घाव का मरहम, 
टूटती राग का मैं सरगम, 
अपने देश का मैं परचम, 
होना चाहता हूँ |
माँ, मैं कुछ तो करना चाहता हूँ |


वो था जो हमसे छूट गया, 
पाला था जो सपना टूट गया, 
उस खेत की सूखी सतह पर 
खुल कर बरसाना चाहता हूँ,  
माँ, मैं कुछ करना चाहता हूँ |  

                                                                         

                                                        -Pankaj Singh "Sahitya"

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